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Dil hun dhadakta hun

दिखे  जो  हस्ता हुआ - है दिल का एक कोना न दिखे वो जो - है रोना लाखों पलों की निशानियाँ कुछ ख़ास दिलों की कहानियाँ सब बस रही इस दिल में बस ये दिल नहीं अब बस में रोक लूँ खुद को या बह जाने दूँ सारी कहानियाँ कह जाने दूँ और इस दिल को एक ज़िन्दगी जी जाने दूँ।। दिल भर आता है,  आँखों में आंसू ठहर जाते आँखों में ख्वाब है आसुंओं को न रख पाते बह जाने देते यूँही जिंदा हूँ मैं हस्ता  हूँ रोता हूँ दिल हूँ  धड़कता हूँ नई धुप में चल पड़ा हूँ खुशियों का जश्न मानते गमों को पीछे छोड़ते यूँही जिंदा हूँ मैं हस्ता  हूँ रोता हूँ दिल हूँ  धड़कता हूँ

Khushiyon ki zameen

खुशियों की न ज़मीन होती  न आसमान होने को एक पल में  हवा हो जाती रहने को संग सदियाँ बिता देती खुशियों की न ज़मीन होती न आसमान बस इस दिल से निकलती इस दिल से होती ये जवान गहरे सागर से मोती चुन लो या बारिश के बसरते  पानी से ओले हर दिल अपनी ख़ुशी चुनता है बेफिक्र के गुब्बारों से हवाओं में उड़ता है न ज़मीन देखता न असमान बस यूँ ही खुशियों से भरी ज़िन्दगी जीने की चाहत करता है और वो ये जनता है खुशियों की न ज़मीन होती न असमान बस इस दिल से निकलती इस दिल से ही होती ये जवान

wo 30 din wahi

मैं हूँ यही पर अब आस्मां वो नहीं कैलेंडर के वो ३०  दिन वही पर ऋतू  है नई ज़िन्दगी जो जी थी यादें बन गई पर कैलेंडर के वो ३०  दिन वही आजकल बस इतवार को फुर्सत रहती है बाकी वारों में खुद को संवारते थोड़े पैसे कमाते कैलेंडर की ओर देख के मुस्कुराते और कहते हम है यही पर अब वो समां नहीं कैलेंडर के वो ३० दिन वही , पर ऋतू है नई वो दिन जब दिन गिनना आदत न थी खुली फिजाओं सा बहना एक  राहत थी  होती थी दिन दोपहरी शाम बेहिसाब मस्तियाँ  ज़िन्दगी जो जी अब वो यादें बन गई कैलेंडर के वो ३०  दिन वही,पर ऋतू है नई

ishq ko jane bina

इश्क में डूबने को मचल रहा  है दिल पर इश्क होता है क्या ,ये सोच सोच के शाम और  सावरे की धुप में पिघल रहा है दिल हर मोड़ पर प्रेम पंछी  टकरा रहे जिससे पूछो "सच है ये प्रेम" का डंका बजा रहे प्रेम के चेहरे  हर घड़ी  बदल रहे एक का साथ छुटा दूजे के संग निकल पड़े पर जिससे पूछो "सच है ये प्रेम" का डंका बजा रहे उम्र की रफ़्तार से घबरा कर इसी पल में इश्क को पा कर कह कह कर इश्क जताने वाले भी मिले वो बेखबर सोचे इश्क की उम्र यही होती कैसा ये इश्क होता कैसी उसकी छाव होती और ये दिल बेचारा पिघलता रहा धुप ढलती  रही पर फिर भी दिल की धड़कने धड़कती रही इश्क को जाने बिना इश्क में डूबने को मचलती रही

lamhe

रात के वो लम्हे आज भी याद है जब चाँद को भी होश न था बेखबर था सारा आस्मां बेखबर थी हर धड़कन यूँही किनारों पे बैठे  रात ढल गई लहरों से लहरें मिल गई हम दो दिल बेखबर थे तारों की चादर ओढ़े एक हुए जा रहे थे एक दूजे में घुलते जा रहे दो दिल आज भी याद है वो फिजाओं का यूँ छु के गुज़रना सारे ख्यालों को संग बहा ले जाना हम दो दिल बेखबर थे एक अलग आस्मां बुन रहे थे बिना कुछ कहे एक दूजे को सून रहे थे ख्वाबों को नहीं अपनी मोहब्बत को जी रहे थे रात के वो लम्हे आज भी याद है साथ बीताये वो लम्हे आज भी याद है

OJAS

हम थे यहीं बस बिखरे थे जैसे आस्मां में तारे अब जो संग है तो जश्न मना रहे सारे फीका लगने लगे अस्मा पे वो सूरज हर दिशा गा रही ये गीत रस हम में है ओजस हम से ये कारवां देखी कहाँ दुनिया तूने देखा एक नया जहाँ ओजस  हम में है ओजस  हम से ये कारवां  रंग दे अपने आसमान  को सजेंगे रंग इतने  यहाँ अपने रंग  को पहचानेगा तू मिलेंगे रंग इतने यहाँ मिलने लगेगी  खोई हुई वो फुर्सत हर धड़कन संग गूँज रहा ये गीतरस हम में है ओजस  कहते थे हम , अब कह रहा सारा जहाँ हम से ये कारवां देखी कहाँ दुनिया तूने देखा एक नया जहाँ ओजस  हम में है ओजस  हम से ये कारवां 

Zindagi ek peheli

ज़िन्दगी एक पहेली है सब कहते है यूँ कह के सब भूल जाते है, अगले ही पल इसे समझाना चाहते है और उलझनो  को गले लगाते है राहो पे अकेले चलना है और संग चल रहे काफिलों में भी डूबना है।। हर मोड़ नया रंग दिखा रह था   पर रंगो की चाहत खोने  लगी.. गम के वो पल आंसुओं के संग बहते नहीं खुशियो के लम्हे पलक झपकते पिघल जाते सूरज की रौशनी से ही दिन नया और सूरज से ही शाम नई  दिल को कोस  रहा हर  कोई पर इस दिल से ही तो ये ज़िन्दगी और इस दिल को हम समझाते ज़िन्दगी एक पहेली है पर कह के सब भूल जाते