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बंजारे बादल

बंजारे बादल यूँही आस्मां से हो के गुज़र रहे थे किस्से कहानियाँ खुद में  समेटे गुज़र रहे थे गौर किया  तो खाली थे , कहानियों को पिछले मोड़ पे बरसा चुके उसी बरसात में पिछले मौसम में एक और कहानी बानी थी आज वो कहानी भी गुज़र गई बरस  गई ,खली हूँ मैं इन बादलों की तरह गुज़र रहा हूँ ज़िन्दगी से हो कर , हवाओं की  दिशा में बंजारे बादल आस्मां में और मैं इस ज़मीन पर है तलाश नई कहानियों की , नई बरसात की 

तनहाई

चलते चलते जहाँ  ये बदल गया ज़मीन थी  खाई बन  गई, महफिलें तनहाई बन गई। पर अभी भी धड़कने चल रही, अकेले में  ही सिसक रही और ढून्ढ रही एक किनारा एक पल जिन्दगी से भरा। रोशनी चमक रही थी  चारों तरफ , चेहरे  भी न देख पा रहा था। ऑंखें बंद कर लूँ तो अपने भगवान को भी ना याद कर पा  रहा था। कैसा ये तनहाई का शहर ! चलते चलते ये शहर बदल गया , तनहाई आदतों  में  बदल  गई बेचैनियाँ नशे में बदल गई।   आज भी वही दिल हुँ पर तनहाई के रेगिस्तान में खोया एक किनारा मिल जाये सारे रंग फिर से बदल जाए।।

Dil hun dhadakta hun

दिखे  जो  हस्ता हुआ - है दिल का एक कोना न दिखे वो जो - है रोना लाखों पलों की निशानियाँ कुछ ख़ास दिलों की कहानियाँ सब बस रही इस दिल में बस ये दिल नहीं अब बस में रोक लूँ खुद को या बह जाने दूँ सारी कहानियाँ कह जाने दूँ और इस दिल को एक ज़िन्दगी जी जाने दूँ।। दिल भर आता है,  आँखों में आंसू ठहर जाते आँखों में ख्वाब है आसुंओं को न रख पाते बह जाने देते यूँही जिंदा हूँ मैं हस्ता  हूँ रोता हूँ दिल हूँ  धड़कता हूँ नई धुप में चल पड़ा हूँ खुशियों का जश्न मानते गमों को पीछे छोड़ते यूँही जिंदा हूँ मैं हस्ता  हूँ रोता हूँ दिल हूँ  धड़कता हूँ

lamhe

रात के वो लम्हे आज भी याद है जब चाँद को भी होश न था बेखबर था सारा आस्मां बेखबर थी हर धड़कन यूँही किनारों पे बैठे  रात ढल गई लहरों से लहरें मिल गई हम दो दिल बेखबर थे तारों की चादर ओढ़े एक हुए जा रहे थे एक दूजे में घुलते जा रहे दो दिल आज भी याद है वो फिजाओं का यूँ छु के गुज़रना सारे ख्यालों को संग बहा ले जाना हम दो दिल बेखबर थे एक अलग आस्मां बुन रहे थे बिना कुछ कहे एक दूजे को सून रहे थे ख्वाबों को नहीं अपनी मोहब्बत को जी रहे थे रात के वो लम्हे आज भी याद है साथ बीताये वो लम्हे आज भी याद है

DO PAL

हम दो दिल है...दो बातें करने को.... दो पल ढून्ढ रहे ढेरों बातें होती यूँ तो...पर है जब रूबरू तो सोच रहे क्या कहूँ.. कह भी दूँ या चुप रहूँ...!!!! इन दो आँखों से दो दिल जुड़ रहे... दो हाथों के सहारे.. दो किनारे मुड़ रहे... चुप के से न जाने कब उसका रंग मुझ पे चड़ने लगा.. मेरी धडकनों की ओर बड़ने लगा।... दो रंग घुल रहे थे..एक असमान रंगने को...दो पल ढून्ढ रहे!!!! ढेरों रंग छलकाते यूँ तो...पर है जब रूबरू रंगों ने भी अकेला छोड़ दिया..और क्या कहूँ...!!! मुस्कुराहटों में कहानिया लिख रहे थे....... चलते चलते उन कहानियो को गुन गूना रहे थे... दो कदम चल के...दो कदम थम के....दो दिल मिल रहे थे!!! जादू हवाओं में कैसा हो रहा था।. बहते बहते गुदगुदा दे... असमान का जैसे कोई संदेसा दे.. हम जो न कह पाए वो हवाएं कहने लगी.. दो लव्ज़ कहने को...दो लव्ज़ सुनने को...दो पल ढून्ढ रहे!!!!!

aankhen

राज़-ऐ-दिल है कई इन आँखों के शीशों को छुपालू कहीं बयां कर देते वो हर बात... जिसके लिए जुबान ने किया था इंकार बेहिसाब एहसासों को समेट कर एक दिल बना कर रखा है सिने में कुछ  एहसास ख़ुशी के...कुछ गम के.. और कुछ राज़  बन कर ठहर गए इस दिल  में.. पर ये आँखें न सम्भलें,बयां करे राज़-ऐ-दिल कई.... काश  इन आँखों के शीशों को छुपालू कहीं ज़िन्दगी कुछ कहानियाँ बुन रही थी.. हर लम्हे  के लिए एक नया रंग चुन रही थी... उन लाखों रंगों की ख्वाहिश  को समेट कर एक दिल बना कर रखा है सिने में  कुछ रंग रंगीले से...कुछ फीके से रह रहे थे इस दिल में.. पर ये आँखें न  सम्भलें,छलका दे हर वो रंग.... काश इन आँखों के शीशों को छुपालू कहीं.... संग मेरे मेरा सनम भी था... वो रंग वो एहसास सारे देख रहा रंगीले से रंग और खुशियों के एहसास को वो भी जी रहा.. पर उन फीके रंगों के लिए... फिजाओं में उसकी फ़िक्र बहने लगी... इसी बहाने नज़दीकियाँ  बढ़ने  लगी...इश्क बढ़ने लगा... आँखों के शीशों को  छुपाने ...

pyar ishq mohbbat

कभी  कहीं यूँही मिले थे वो दिल आँखों में बातें और खामोश जुबान की महफ़िल हवा की गुदगुदी ,बारिश की चाहत कुछ अंजना सा होने की आहट कहते है मोहब्बत इसे,न पता था...... हर लम्हा खुशियों की लहरों  से सटा था... बीते  हुए कल की तस्वीर न समझो इसे... पर हकीकत को झूट्लाये कैसे  वो  भूल गए हमे और मोहब्बत मेरी हो गयी  तन्हा जब जब  याद आते  वो लम्हे .....जीता हूँ मैं दूसरा जहाँ.....!!! करता  हूँ  तुझसे इज़हार इश्क का.... झुकता है सर तेरे आगे....तू है दिलबर   अनजाना  था वो रिश्ता  और था   मैं बेखबर..... बीत गए वो लम्हे वो घड़ियाँ न जाने कितनी सदियाँ फिर भी रहेगा तुझ पर दिल का एतबार सद्कः करूँ अपने इश्क पे बार बार..... स्द्कः करूँ अपने इश्क पे बार बार......