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बंजारे बादल

बंजारे बादल यूँही आस्मां से हो के गुज़र रहे थे किस्से कहानियाँ खुद में  समेटे गुज़र रहे थे गौर किया  तो खाली थे , कहानियों को पिछले मोड़ पे बरसा चुके उसी बरसात में पिछले मौसम में एक और कहानी बानी थी आज वो कहानी भी गुज़र गई बरस  गई ,खली हूँ मैं इन बादलों की तरह गुज़र रहा हूँ ज़िन्दगी से हो कर , हवाओं की  दिशा में बंजारे बादल आस्मां में और मैं इस ज़मीन पर है तलाश नई कहानियों की , नई बरसात की 

Corrupt Ho gaye

जन्म  से हम यूँ  न थे उम्र  के साथ corrupt होते जा रहे हम चहक न पारहे थे उस बचपन  की तरह  हम , उन्ही बचपन के रिश्तों के संग शायद रिश्तों  के रंग गहरे होते जा रहे और गहराई इतनी  कि वो रिश्ते खोते जा रहे डूब रहे वो रिश्ते एक नई ज़मीन कि खोज में पर मैं  मासूम हूँ , जान बूझ कर एहसास हुआ जन्म  से यूँ न  थे उम्र  के साथ corrupt होते जा रहे हम।