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सौदे में सुकून

कहीं सीने में जब  धड़कन की  रफ़्तार तेज़ हो उठीती खून की हलचल बहते बहते हज़ारों ख्याल संग लाती दिल में वो हज़ारों ख्याल वो खून आते है पर सौदे में अक्सर सुकून और चैन के ये सौदा न होता तो धड़कने रूक जाती वो हलचल थम जाती दो लम्हा बीता दिए बिना सुकून और चैन के और थक कर जब ज़मीन पर टूटा तो एक हवा का झोंका कुछ दे गया मुस्कराहट की  वो पोटली , और हज़ारों नए ख्याल नया खून इस बार सौदे के लिए न सुकून था न चैन झाँका तो पाया सब वहम था न सौदा था न कोई पोटली में  मुस्कराहट और कहीं न गया था मेरा सुकून मेरा दिल मेरा ख्याल और मेरा ही था वो खून अब हलचल भी कह कर होती है आहिस्ता आहिस्ता दिल  में बहती है ।

परछाई

पानी में परछाई भी अजीब थी धुंदली सी थी मगर  सच्चाई के कुछ करीब थी वो पानी छलका तो मानो , दिल हल्का हो गया छलकी सी आँखों को सहारा मिल गया और बह गए सारे पल ,अब बस एक हलकी सी मुस्कराहट बाकी है परछाई अभी भी धुंदली सी है मगर कुछ साफ़ है - शायद दिल का वो कोना क्यूंकि रंग बदले नहीं आस्मां अभी भी नीला है हवा छु कर  गुज़रे तो गुदगुदी अभी भी करती पर फिर भी नई सी लग रही थी ज़िन्दगी पानी मैं वो परछाई अजीब थी धुंदली  सी थी  मगर  कुछ सच्चाई के करीब थी #water #heart #786snehil #honesttoyourself 

Dil hun dhadakta hun

दिखे  जो  हस्ता हुआ - है दिल का एक कोना न दिखे वो जो - है रोना लाखों पलों की निशानियाँ कुछ ख़ास दिलों की कहानियाँ सब बस रही इस दिल में बस ये दिल नहीं अब बस में रोक लूँ खुद को या बह जाने दूँ सारी कहानियाँ कह जाने दूँ और इस दिल को एक ज़िन्दगी जी जाने दूँ।। दिल भर आता है,  आँखों में आंसू ठहर जाते आँखों में ख्वाब है आसुंओं को न रख पाते बह जाने देते यूँही जिंदा हूँ मैं हस्ता  हूँ रोता हूँ दिल हूँ  धड़कता हूँ नई धुप में चल पड़ा हूँ खुशियों का जश्न मानते गमों को पीछे छोड़ते यूँही जिंदा हूँ मैं हस्ता  हूँ रोता हूँ दिल हूँ  धड़कता हूँ

Khushiyon ki zameen

खुशियों की न ज़मीन होती  न आसमान होने को एक पल में  हवा हो जाती रहने को संग सदियाँ बिता देती खुशियों की न ज़मीन होती न आसमान बस इस दिल से निकलती इस दिल से होती ये जवान गहरे सागर से मोती चुन लो या बारिश के बसरते  पानी से ओले हर दिल अपनी ख़ुशी चुनता है बेफिक्र के गुब्बारों से हवाओं में उड़ता है न ज़मीन देखता न असमान बस यूँ ही खुशियों से भरी ज़िन्दगी जीने की चाहत करता है और वो ये जनता है खुशियों की न ज़मीन होती न असमान बस इस दिल से निकलती इस दिल से ही होती ये जवान