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सौदे में सुकून

कहीं सीने में जब  धड़कन की  रफ़्तार तेज़ हो उठीती खून की हलचल बहते बहते हज़ारों ख्याल संग लाती दिल में वो हज़ारों ख्याल वो खून आते है पर सौदे में अक्सर सुकून और चैन के ये सौदा न होता तो धड़कने रूक जाती वो हलचल थम जाती दो लम्हा बीता दिए बिना सुकून और चैन के और थक कर जब ज़मीन पर टूटा तो एक हवा का झोंका कुछ दे गया मुस्कराहट की  वो पोटली , और हज़ारों नए ख्याल नया खून इस बार सौदे के लिए न सुकून था न चैन झाँका तो पाया सब वहम था न सौदा था न कोई पोटली में  मुस्कराहट और कहीं न गया था मेरा सुकून मेरा दिल मेरा ख्याल और मेरा ही था वो खून अब हलचल भी कह कर होती है आहिस्ता आहिस्ता दिल  में बहती है ।