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ishq ko jane bina

इश्क में डूबने को मचल रहा  है दिल पर इश्क होता है क्या ,ये सोच सोच के शाम और  सावरे की धुप में पिघल रहा है दिल हर मोड़ पर प्रेम पंछी  टकरा रहे जिससे पूछो "सच है ये प्रेम" का डंका बजा रहे प्रेम के चेहरे  हर घड़ी  बदल रहे एक का साथ छुटा दूजे के संग निकल पड़े पर जिससे पूछो "सच है ये प्रेम" का डंका बजा रहे उम्र की रफ़्तार से घबरा कर इसी पल में इश्क को पा कर कह कह कर इश्क जताने वाले भी मिले वो बेखबर सोचे इश्क की उम्र यही होती कैसा ये इश्क होता कैसी उसकी छाव होती और ये दिल बेचारा पिघलता रहा धुप ढलती  रही पर फिर भी दिल की धड़कने धड़कती रही इश्क को जाने बिना इश्क में डूबने को मचलती रही

lamhe

रात के वो लम्हे आज भी याद है जब चाँद को भी होश न था बेखबर था सारा आस्मां बेखबर थी हर धड़कन यूँही किनारों पे बैठे  रात ढल गई लहरों से लहरें मिल गई हम दो दिल बेखबर थे तारों की चादर ओढ़े एक हुए जा रहे थे एक दूजे में घुलते जा रहे दो दिल आज भी याद है वो फिजाओं का यूँ छु के गुज़रना सारे ख्यालों को संग बहा ले जाना हम दो दिल बेखबर थे एक अलग आस्मां बुन रहे थे बिना कुछ कहे एक दूजे को सून रहे थे ख्वाबों को नहीं अपनी मोहब्बत को जी रहे थे रात के वो लम्हे आज भी याद है साथ बीताये वो लम्हे आज भी याद है

OJAS

हम थे यहीं बस बिखरे थे जैसे आस्मां में तारे अब जो संग है तो जश्न मना रहे सारे फीका लगने लगे अस्मा पे वो सूरज हर दिशा गा रही ये गीत रस हम में है ओजस हम से ये कारवां देखी कहाँ दुनिया तूने देखा एक नया जहाँ ओजस  हम में है ओजस  हम से ये कारवां  रंग दे अपने आसमान  को सजेंगे रंग इतने  यहाँ अपने रंग  को पहचानेगा तू मिलेंगे रंग इतने यहाँ मिलने लगेगी  खोई हुई वो फुर्सत हर धड़कन संग गूँज रहा ये गीतरस हम में है ओजस  कहते थे हम , अब कह रहा सारा जहाँ हम से ये कारवां देखी कहाँ दुनिया तूने देखा एक नया जहाँ ओजस  हम में है ओजस  हम से ये कारवां 

Zindagi ek peheli

ज़िन्दगी एक पहेली है सब कहते है यूँ कह के सब भूल जाते है, अगले ही पल इसे समझाना चाहते है और उलझनो  को गले लगाते है राहो पे अकेले चलना है और संग चल रहे काफिलों में भी डूबना है।। हर मोड़ नया रंग दिखा रह था   पर रंगो की चाहत खोने  लगी.. गम के वो पल आंसुओं के संग बहते नहीं खुशियो के लम्हे पलक झपकते पिघल जाते सूरज की रौशनी से ही दिन नया और सूरज से ही शाम नई  दिल को कोस  रहा हर  कोई पर इस दिल से ही तो ये ज़िन्दगी और इस दिल को हम समझाते ज़िन्दगी एक पहेली है पर कह के सब भूल जाते

zindagi abhi baaki hai

कुछ रातें चाँद बिना सजने लगी कुछ लम्हे  न चाहते हुए बी सच होने लगे कुछ चाहते पीछे छुट रही थी कुछ ख्वाहिशें खिलाफ हो रही थी  फिर एक नई  सुबह मैं जिन्गदी जागी है  कह रही मुझ से जिन्गदी अभी बाकी है  कुछ यादें लहरों सी  मचले पल पल  किनारों तक आ के बिखरे हर पल  रुला रही इस दिल को ये यादें  बेवफा हो रही थी हवाएं  भी एक पल में एक सदी समां रही थी  ये सदी काटे नहीं कट रही थी तभी एक नई सुबह में  जिन्गदी जागी है  कह रही मुझ से जिन्गदी अभी बाकी है  तारो के सेहर चला गया कोई  इंसानों की बस्ती को छोड़ अकेले रह गए हम अजीब था वो मोड़ अजनबी लगने लगा हर चेहरा फीका लगने लग हर रंग तभी एक नई रंग में सुबह जागी है  कह रही मुझ से जिन्गदी अभी बाकी है 

behisaab baatein

अनगिनत  चेहरे  है  आस  पास बेहिसाब बातें  हो   रही  आस  पास कुछ  दिल  को  छु  रही कुछ  दिल  को  चूब  रही काश  ये  बातें  ये  चेहरे  हवा  के  झोंके  होते... छु  के  गुज़र  जाते नज़र  न  आते ..दिल  को  यूँ  न  रुलाते.. कोई  इस  दिल  के  करीब  था कोई  अजनबी  था .. दो  बातें  हर चेहरा  कर  रहा  था .. काश  ये  दो  बातें  दो  पल  से  होते .. रात  के  साथ  बीत  जाते दिल  को  यु  न  रुलाते... ज़िन्दगी  का गम  उनकी बातों  में   ढल  गया बातों का रंग मजाक   में  बदल  गया ... ना  किसी  को  दर्द  दिख  रहा  था ...न  ज़ख्म बस  बातें  कही  जा रही  थी .. काश  ये...

yaarian

बेफिक्र बेखबर हो रहे पल खुश रहने की वजह यूँही मिल रही यारियां सारी हवाओं में घुल रही.. हवाओं में घुल कर जिन्दगिया बदल रही घूम घूम कर सारे रास्ते नापते रहेते है संग कभी गिर कर कभी गिरा कर हाफ्ते रहते है संग फिर एक घेरा बना कर....मुट्ठिया यूँ खोलते मनो फिजाओं को आज़ाद हो हम करते खुश रहने की वजह यूँही मिल रही यारियां सारी हवाओं में घुल रही.. घोड़ो पे सवार रफ़्तार की रेस हर पल तू हारे मैं जीतूँ...जीत कर तुझ संग ही वो जीत मैं बाटूँ एक जोश बहता रहे युही , हो जब संग फुरसतो के लम्हे बिठाये  बिताये  बेफिक्र हो कर इशक जताए खुश रहने की वजह यूँही मिल रही यारियां सारी हवाओं में घुल रही.. बारिशो में वो ज़मीन पे पानी बारी बारी भीग कर फिर ब्यान करना अपनी ही जुबानी ठण्ड से ठितूर कर हवाओं से लड़ कर, करना मन मानी और मुट्ठिया यूँ खोलते मनो फिजाओं को आज़ाद हो हम करते खुश रहने की वजह यूँही मिल रही यारियां सारी हवाओं में घुल रही..