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DO PAL

हम दो दिल है...दो बातें करने को.... दो पल ढून्ढ रहे ढेरों बातें होती यूँ तो...पर है जब रूबरू तो सोच रहे क्या कहूँ.. कह भी दूँ या चुप रहूँ...!!!! इन दो आँखों से दो दिल जुड़ रहे... दो हाथों के सहारे.. दो किनारे मुड़ रहे... चुप के से न जाने कब उसका रंग मुझ पे चड़ने लगा.. मेरी धडकनों की ओर बड़ने लगा।... दो रंग घुल रहे थे..एक असमान रंगने को...दो पल ढून्ढ रहे!!!! ढेरों रंग छलकाते यूँ तो...पर है जब रूबरू रंगों ने भी अकेला छोड़ दिया..और क्या कहूँ...!!! मुस्कुराहटों में कहानिया लिख रहे थे....... चलते चलते उन कहानियो को गुन गूना रहे थे... दो कदम चल के...दो कदम थम के....दो दिल मिल रहे थे!!! जादू हवाओं में कैसा हो रहा था।. बहते बहते गुदगुदा दे... असमान का जैसे कोई संदेसा दे.. हम जो न कह पाए वो हवाएं कहने लगी.. दो लव्ज़ कहने को...दो लव्ज़ सुनने को...दो पल ढून्ढ रहे!!!!!

Mang lun udhar

बेरंग पत्तों की आहट सुनी सुनी  सी लग रही थी वो टूट कर बिखर रहे थे शाखाओं से गिर के उड़ रहे थे ठोकर लगी ,होश संभाला तो पाया  वो वो पत्ते मेरी ज़िन्दगी  के आयेने है जो टूट कर बिखर रही थी..... फ़र्क सिर्फ इनता था मेरी ज़िन्दगी में  जान बाकि थी और उन पत्तों में  जूनून मुरझाये तो भी आंसू नहीं , मौसम की छाया में फिर खिलने की  चाह  नई मांग लूँ  उधार ये फितूर फिर हो मुश्किलें  चाहे  बेहिसाब पिघल जाएगी हर मुश्किल जल उठेगी अगर वो जूनून की आग !!!!! असमान की कोशिश थी सागर को नीले नकाब से वो  ढँक दे पर सागर की कोशिश थी की वो नकाबों में न ढले... ठोकर लगी होश समभाला तो पाया सागर की मुश्किलें मेरी ज़िन्दगी से कम  न  थी .... फर्क  सिर्फ इतना था मेरी ज़िन्दगी हार मान चुकी थी..और सागर की कोशिशो का अंत न था... लहरों में  खुद को बाँट कर..किनारों तक आने की कोशिश वो करता रहा... सदियाँ बिता दे...उस नीले नकाब को उतारने  की कोशिश में....पर न  थकत...

charcha hui

Inspired from songs like kajra re(BnB) ,chokra jawan re(ishqzade), pritam pyare(Rowdy Rathore) etc!! :) उसने चौक पे कुछ ऐसे मोहब्बत ज़ाहिर की... हम तो चुप रह गए.. मगर पूरे शहर ने चर्चा की...!!! ज़ालिम आशिक है...पर चुभन भी देता है... जैसे गुलाबों में कटा भी कोई रहता है.... चुभे तभी तो याद आता है.... और ये आशिक नाम का कटा इस दिल को सताता है... हम तो चुप रह गए....दर्द सह गए... मगर पूरे शहर ने चर्चा की.... कह ले मुझे कटा या कसूर तेरे दर्द का.. आशिक हूँ  तेरा, तेरी डांट में भी इश्क़ का रस ढूंड लूँ ज़माने की परवाह न करूँ तू भी मेरे इश्क में डूब जा अरे  जा  जा ज़ालिम  आशिक मेरे तेरी नियत न जाने कब बदल जाए..... नियत का पता नहीं  पर जो तू मेरे इश्क में  डूब जाये तेरी दिल्ली को महल बना दूं... चौक पे तेरे चाँद को ला दूं.. ज़माने की हवा भी बदल जाएगी अँखियों में  सुरमा जो  लगाएगी तो  चर्चा  फ़िल्मी सितारों सी होगी ... इस चौक पे क्या पूरे बम्बई  नगरिया म...

Paani ka Rang

पानी का रंग सोच के आँखें वो नम देख के... पानी का रंग सोच के तुझ में ही बहता मैं गया.... तुझ में ही बहता मैं गया.... नज़रों का ज़ोर या दिल का शोर था वो... दिल तो मेरा था पर तेरी ओर था वो.. नज़रों का ज़ोर या दिल का शोर था वो... दिल तो मेरा था पर तेरी ओर था वो.. इश्कों का ढंग सोच के..... इश्कों का ढंग सोच के..... तुझ से ही इश्क हो गया.... तुझ से ही इश्क हो गया.... अब जो तू है संग मेरे.. आसुंओं को   छोड़ दे.... अब जो तू है संग मेरे.. आसुंओं को छोड़ दे.... खुशियों के रंगों को थामें.. ये जहाँ तू रंग दे...!!!! खुशियों के रंगों को थामें.. ये जहाँ तू रंग दे...!!!! चंदा का रूप देख के.... अक्स तेरा महसूस कर के.... तेरा ही  मैं होता गया.... तुझ में ही बहता मैं गया.. तुझ में ही बहता मैं गया.. मौसम की अंगड़ाई दिल को छु रही.. धुप में ये बरखा यूँ खिल रही... कारी रातें भुला रही..भीगी बाँहों में बुला रही..ये बरखा आज... तू भी आ सब कुछ भूल के... तू भी आ सब कुछ भूल के... मुझ में ही खुद को ढून्ढ ले.....

aankhen

राज़-ऐ-दिल है कई इन आँखों के शीशों को छुपालू कहीं बयां कर देते वो हर बात... जिसके लिए जुबान ने किया था इंकार बेहिसाब एहसासों को समेट कर एक दिल बना कर रखा है सिने में कुछ  एहसास ख़ुशी के...कुछ गम के.. और कुछ राज़  बन कर ठहर गए इस दिल  में.. पर ये आँखें न सम्भलें,बयां करे राज़-ऐ-दिल कई.... काश  इन आँखों के शीशों को छुपालू कहीं ज़िन्दगी कुछ कहानियाँ बुन रही थी.. हर लम्हे  के लिए एक नया रंग चुन रही थी... उन लाखों रंगों की ख्वाहिश  को समेट कर एक दिल बना कर रखा है सिने में  कुछ रंग रंगीले से...कुछ फीके से रह रहे थे इस दिल में.. पर ये आँखें न  सम्भलें,छलका दे हर वो रंग.... काश इन आँखों के शीशों को छुपालू कहीं.... संग मेरे मेरा सनम भी था... वो रंग वो एहसास सारे देख रहा रंगीले से रंग और खुशियों के एहसास को वो भी जी रहा.. पर उन फीके रंगों के लिए... फिजाओं में उसकी फ़िक्र बहने लगी... इसी बहाने नज़दीकियाँ  बढ़ने  लगी...इश्क बढ़ने लगा... आँखों के शीशों को  छुपाने ...

Behta chal

मूक बन खड़ा क्या तक रहा रफ़्तार की भांप क्या नाप रहा रही है तू चालत चल नदी है तू बहत चल थम कर जम कर बहते पानी ने क्या पाया रही है तू चालत चल नदी है तू बहत चल।। जियन मरण तो लगा रहेगा,पर जीवन लय में तू न बहेगा अगर छुट जाएगी टूट जाएगी ये डोर न रुक न शुक इस लय में हर सुख हर दुःख इस लय में बहता चल न थम कहीं रफ़्तार से जीवन...जीवन की रीत यही। हर फूल हर कलि किरण आगे बढ़ रहे ऋतुओं की धरा में बदल रहे न थम रहे न जम रहे...इस जीवन की रफ़्तार में बढ़ रहे तू तो फिर भी मानव का रूप है पावन धरती पर जीवन का स्वरुप है फिर क्यूँ थक रहा..अपने आप से झिझक रहा?? खोल बाहें इस सफ़र में जी कर जीत जा ये जीवन दिल है तू धड़कता जा रौशनी है तू बहता जा कैद होकर उस रौशनी ने क्या पाया.. दिल है तू धड़कता जा रौशनी है तू बहता जा ।।

Ye Kahaniya

बस मैं नहीं दिल की बस्तियां मचल रही आँखों की कश्तियाँ लहरों की बाहों में है किनारे मेरी बाहों में तू आजा रे... मैं हु....तुम हो....और ये कहानियाँ इश्क के मौसम की है ये  निशानियाँ तेरे संग बीताये वो बारिश के लम्हे भीगे आसमान तले...मुस्कुराते हम दो परिंदे.. आज भी उड़ता हूँ उन लम्हों को याद कर... जब बारिश की बूंदों  को हमने मोती बना दिया.... इश्क जाताना था सो आस्मां पे चाँद सजा दिया.... मैं हु....तुम हो....और ये कहानियाँ इश्क के मौसम की ये है निशानियाँ हवा के झोकों  पे शहर न बसा तू.. इश्क की गलियों में मुझको न फसा तू.. बारिश में साथ घुमे तो इश्क कहाँ हुआ.... खुशिया संग बाट ली तो इश्क कहाँ हुआ... मैं हूँ...तुम हो....पर ये कहानियाँ... न तो इश्क है...ना ही इश्क के मौसम की निशानियाँ.. फूलों के तोफ्हे जो भी तुने दिए थे... फूल ही तो थे....ये सोच  के मैंने  लिए थे... चाँद को खुदा ने सजा रखा है...तुमने तो बस  यूँही कहा है.... खुशिया हर पल मिली तेरे संग...पर इश्क कहाँ हुआ... मैं हूँ...तुम हो....पर ये कहानियाँ... न...