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kabhi kabhi

कभी कभी ये असमान यूँ नीला लगे जैसे सागर की छत हो... कभी कभी ये सागर की लहरें यूँ लगें जैसे बादलों की करवट हो.... कभी कभी ये दिल धड़कने के लिए मचलता है.... कभी कभी मचलने के लिए धड़कता है...... और मैं बेबस खड़ा मुस्कुरा रहा था....खुद को गले लगा रहा था..... कभी कभी इन तितलियों के रंगों को समझू मैं.. कभी कभी उन्ही रंगों को जीवन  में तलाशू मैं..... कभी कभी इस रात की चादर में खुद को छुपा लू... और कभी  सूनी राहों में एक पल छाया मांग लू...... हर हरकत में कुछ सवाल थे....पर अकेला था दिल..सो धड़कता जा रहा था.... और मैं बेबस खड़ा मुस्कुरा रहा था...... कभी कभी एहसास हो प्यार का तो दिशाएं संग झूमे... और कभी  इन्ही  दिशाओं में गुम हो जाये दिल..... कभी कभी तन्हाईओं में सुकून मिले.. और कभी दिल पुकारे अपने सहारे को.... इस मन के हर रंग अजीब है.....कभी कभी यूँ सोच रहा था मैं.... साथ ही मुस्कुरा रहा था.....खुद को गले लगा रहा था......

Sooraj ke sang wo sham

उस दिन का सूरज न जाने डूबते डूबते क्या कह गया..... इन सासों को धडकनों से उलझा गया.... बहका सा ये मन बिखर सा गया.. न जाने वो डूबता सूरज क्या कह गया.. हर नब्स की जान भी थक चुकी थी... तूफ़ान से लड़ रहे हो कुछ यूँ मेरी धड़कने चल रही थी... कुछ सोचता था ये मन....कुछ कहता न.... हर बात में नया सा बहाना ढूँढता रहता.. बस यूँही उदास था मैं...कुछ सोच कर.. तलाशता रहा मैं कुछ जवाब.. सवालों की शक्ल भी धुंदली सी थी.... बेचैन सा मन न जाने क्या सह रहा था... हर घडी अलग दिशा में बह रहा था.. पर न जाने क्यूँ ऐसा लगा... वो डूबता सूरज कुछ कह रहा था.... अपने ही ख्याल पर फिर हस पड़ा मैं..... अपनी उलझनों के लिए सूरज को कोस रहा था... बेवजह सूरज की ख़ामोशी को लव्ज़ों मैं तोल रहा था.. अजीब है मन...ये है दिल...ये धड़कन.. या वो लम्हा अजीब था...जब बूझ रहा था सूरज सागर की लहरों से.... खूबसूरत था मंज़र कहते है लोग... पर मेरा जहाँ शायद इस बूझते सूरज को देख कर उदास था... शायद .....शायद पर ही वो शाम ढल गई.... उस दिन का सूरज न जाने डूबते डूबते क्या कह गया.....

Muskan

हर मुस्कान के दो माईने है... कभी वो ख़ुशी कभी गम के आईने है.. जो पहचानो तुम इस नकाब को.. समझो कलाकार हो तुम....... खो गए इनकी परछाइयो में कहीं.... समझो नादान हो तुम... हर  वो दिल जो अज़ीज़ है करता है यूँ कभी कभी..... ख़ुशी तो संग बाट लेता...पर दर्द को छुपाता है...  जो महसूस करो तुम इस एहसास को.... समझो आशिक  हो तुम.... अगर न समझे ये  माईने.... तो ज़िन्दगी को  समझना बाकि है.... ये जान लो तुम..... आस्मां भी तारों की कहानी छुपाता है... सूरज की बाहों में बेदाग मुस्कुराता है..... हर ज़र्रे के दो एहसास होते है.... कभी वो ख़ुशी कभी वो गम के पास होते है.... मुस्कुरा कर हमने भी दर्द छुपा लिए.... दुआ है इस दिल की...जब भी मिलो हमसे... इस नकाब को पहचान लो तुम....!!!

baaware jiya

बाँवरे से जिया में हलचल है... चुब रहे कांटे से ये हवा के झरोके...... तारे भी आँखों को सुकून न दे रहे....यूँ टीम टिमा रहे..... आज न जाने किस  घडी चैन आये..... रहत मिले या ये रात पिघल जाये.... इस बेचैनी में दिल ने अजीब सा पासा फेका.....  उसकी धुंदली तस्वीर  बनाने लगा और मेरी नसे  थमने  लगी ... ये हवा के झरोके काटे से चुबने लगे.. बाँवरे से जिया में हलचल बदने लगी.. ओ साथी रे...ये कैसा जादू तेरा..... मखमली सी रात को भी काट न पाऊ मैं.... काट रही ये मुझे हर गुज़रते लम्हे में..... मगर तेरे साथ की आशा ने जोड़े रखा है.... दूर काहे मुझ से यूँ तू है...... इस दिल की जान तू है...... तू संग जो है...तो सूखे पत्ते भी जी उठे.... ये रात भी तारों से सजने लगे..... वरना हर ज़र्रा धोखा  देता है..... पत्ते भी उड़ जाते है....तारे भी सो जाते है.... न जा दूर यूँ...ओ साथी रे..... ये कैसा जादू तेरा........ न जा दूर यूँ ..ओ साथी रे....

Vande Matram

वन्दे मातरम वन्दे मातरम  जीवन तुझसे है तुझसे हर मौसम पुष्प सुमन महक रहे हर डगर सूर्य भी करता नद्मस्तक अपना सर माँ तेरी छाँव अनमोल है...... तू करोडो दिलों का  है संगम वन्दे मातरम वन्दे मातरम सरहदों की जंग से हो रहा तेरे हृदय पे वार प्रण है माँ.....तुझ से...ये आस्मां है गवाह... तेरी रक्षा ही परम धर्म है लहू की न फ़िक्र ,जान से पहेले कर्म है माँ तेरी छाँव अनमोल है...... तू करोडो दिलों का  है संगम वन्दे मातरम वन्दे मातरम हर कण में जाग उठे वो भक्ति....हर कण जाग उठे.... मातृप्रेम की है वो शक्ति..... सागरों के तट से.....हिम की छोटी तक....  बीती हुई सदियों से..... इस  क्षण तक..... नमन है तुझे माँ....तेरे ह्रदय की करुणा को..... माँ तेरी छाँव अनमोल है...... तू करोडो दिलों का  है संगम वन्दे मातरम वन्दे मातरम

Kuch yun karo na-a duet song

hey aditi  यूँ करो न....... वो असमान के जहाँ से... कुछ बादलों को अपना बना के अपना प्यार उनमें भरो........ hey अदिति यूँ करो ताकि जब बरसे ये बादल ये बूंदे... मैं भीगूँ  तेरे इश्क में..... चाहत ये मेरे दिल की पूरी करो न......!!!!! hey aditi  कुछ  यूँ करो न....... ज़रा इंतज़ार फरमाइए.... पहले हमे चाँद तोफ्हे में लाइए  आस्मां तो ठहरा हुआ है..... चाँद तो बहता हुआ है.....पिघल रहा  हर रात.... hey sameer यूँ करो तुम...... न मैंने कछ सोचा न जाना...... चाँद को अपना तोफहा माना..... तुम्हे जो मोहब्बत है ....... तो  इतना करो न  तुम ...... hey sameer यूँ करो तुम...... aditi तुमने जो कह दिया है..... मेरी चाहतों को बदल दिया है..... मुस्कुरा कर देखा मैंने आसमान   तुम हो मैं हूँ.. बादलों के टुकड़ों को रहने दो उस जहाँ.... प्यार की बूंदे ज़मीन पे बरसने दो......पर उन बादलों को रहने दो...... aditi यूँ करो न...मेरी बाँहों में खुद को खोने दो न..... hey aditi यूँ करो न..... न न न...हवा जो बह चली वो थमती नहीं......

Rehne de bande

रहने दे बन्दे वो तू रहने दे बन्दे  उन यादों के  सूखे पत्तो को तू रहने दे बन्दे उड़ते है  चूर हो जाते है पर दिल को रुला जाते है  उन पत्तों को  खुली फिजाओं में उड़ जाने दे बन्दे वो तू रहने दे बन्दे पिघल गई है रात  रात  की हर बात  अब नई सुबह में पंछियों को कहने दे बन्दे  बादलों की शक्ल भी बदल गई लहरों का अक्स भी बिखर गया  फिर भी खूबूसरत है  ये  जहाँ तू उन बिखरी हुई लहरों को रहने दे बन्दे  रहने दे बन्दे वो तू रहने दे बन्दे  साथी मुखौटों का न बन तू दिल की हर बात चेहरे  से कह तू छुट जाते है वो नाकाबि रिश्ते  उन रिश्तो को रहने दे बन्दे वो तू रहने दे बन्दे