1 बड़ो के आदर में हाथ जोड़ना , नमन करना 2 छोटों को स्नेह कर उनके साथ मुस्कुराना 3 बिना किसी भेद भाव के हर किसी के साथ मिलना ,ही परम आचार - शिष्टाचार है। 4 अपनी वाणी को हमेशा निर्मल रखना 5 सत्य वचन से कभी न मुह मोड़ना 6 अपनी सोच को प्रेम से बताना क्रोध न करना , ही परम आचार - शिष्टाचार है। 7 प्रकृति की रक्षा करना 8. पशु पक्षियों को आज़ाद ही रहने देना 9. अपने मित्रों को भी प्रेरित करना की प्रकृति की रक्षा करें , ही परम आचार -शिष्टाचार है। 10 समय पर अपना कार्य पूरा करना 11 दिनचर्या को समयानुसार संचालित करना 12 पढाई खेल-कूद (क्रीड़ा) कला सबको समय देना सबमें मेहनत करना , ही परम आचार -शिष्टचार है 13 कुछ नियम सिख लिए , कुछ नियम सिख रहा और सारे नियम सीखना है मुझे 14 खुद पर लागू कर आगे बढ़ना है मुझे 15 निरंतर प्रयास मुझे करते रहना है क्य...
हर पल कोई नया ख्वाब जाग रहा है.... हर ख्वाब दिल की रफ़्तार सा भाग रहा है.... बहती नदी सा ये बहा ले चले....हर मोड़ पर नयी रेत मिले.. सोचता हूँ मैं.....कब रुकेगा ये सफ़र....कब मिलेगी मंजिल... अगले ही पल...पलक झपकते असमान दिखे.... और नया ख्वाब जीने लगे...!! हस्ते मुस्कराते यूँ ही जी रहा है ये दिल.... हूँ खुश कभी....कभी मांग रहा खुशियों का साहिल... अजनबी लहरों से खेल रहे है हम......!!! भीड़ में खुद को खो रहे है हम..... ये क्या कर रहे है हम...??? अगर ऐसा सोचे भी दिल ..... तो अगले ही पल उठता है तूफान सा दरिया में....... धुन्दला जाता हर ख्वाब हर ख्याल.... फिर एक मीठी सी मुस्कराहट आती है चेहरे तक........ और धुल जाते सारे सवाल सारे ख्याल ....... हस्ते मुस्कराते यूँ ही जी रहा है ये दिल....
हम दो दिल है...दो बातें करने को.... दो पल ढून्ढ रहे ढेरों बातें होती यूँ तो...पर है जब रूबरू तो सोच रहे क्या कहूँ.. कह भी दूँ या चुप रहूँ...!!!! इन दो आँखों से दो दिल जुड़ रहे... दो हाथों के सहारे.. दो किनारे मुड़ रहे... चुप के से न जाने कब उसका रंग मुझ पे चड़ने लगा.. मेरी धडकनों की ओर बड़ने लगा।... दो रंग घुल रहे थे..एक असमान रंगने को...दो पल ढून्ढ रहे!!!! ढेरों रंग छलकाते यूँ तो...पर है जब रूबरू रंगों ने भी अकेला छोड़ दिया..और क्या कहूँ...!!! मुस्कुराहटों में कहानिया लिख रहे थे....... चलते चलते उन कहानियो को गुन गूना रहे थे... दो कदम चल के...दो कदम थम के....दो दिल मिल रहे थे!!! जादू हवाओं में कैसा हो रहा था।. बहते बहते गुदगुदा दे... असमान का जैसे कोई संदेसा दे.. हम जो न कह पाए वो हवाएं कहने लगी.. दो लव्ज़ कहने को...दो लव्ज़ सुनने को...दो पल ढून्ढ रहे!!!!!
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